श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत लोगोश्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत44 श्रेणी ( रजि. ), इंदौर

वार्षिक उत्सव

श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत 44 श्रेणी ( रजि. ), इंदौर

पंजीयन क्रमांक : 03/27/03/08161/31-12-04

1. रक्षाबंधन

प्रतिवर्षानुसार रक्षाबंधन यानी श्रावण पूर्णिमा के दिन प्रातः काल समाज बंधुओं द्वारा ब्रह्मसूत्र ( यज्ञोपवीत ) बदलने एवं पितरों को तर्पण करने का श्रावणी पर्व मनाया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दश विधि स्नान, पितृ तर्पण, सप्त ऋषि पूजन और यज्ञ आदि कर्म विद्वान आचार्य के मार्गदर्शन में पूर्ण होता है। इस श्रावणी उपक्रम में समाज के बंधु उत्साह से शामिल होते हैं। समाज की प्रबंध कार्यकारिणी एवं बजरंग मंडल सदस्यों के सहयोग से यह पुण्य कार्य संपन्न होता है। समाज में यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है।

2. 15 अगस्त

15 अगस्त के राष्ट्रीय पर्व का आयोजन समाज की प्रबंध कार्यकारिणी एवं समाज बंधुओं द्वारा आयोजित किया जाता है। इसके तहत झंडा वंदन के साथ ही ऐसे प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान किया जाता है जिन्होंने बोर्ड परीक्षा, स्नातक, स्नातकोत्तर, इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित अन्य परीक्षाओं में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया हो। साथ ही प्रादेशिक, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भागीदारी करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाता है। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठ नागरिकों का समाज द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया जाता है। इसके अलावा बोर्ड, विश्वविद्यालय एवं खेल में समाज में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर समाज के महानुभावों द्वारा अपने परिजनों की स्मृति में विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। पूरा आयोजन शिक्षा मंत्री महोदय के दिशा-निर्देशन में होता है।

3. जन्म अष्टमी

जन्माष्टमी के पर्व को श्री कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में श्री चारभुजा नाथ जी मंदिर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। भजन-कीर्तन के बाद मध्यरात्रि में जन्म आरती होती है और समाज पंचायत की ओर से पंजीरी एवं प्रसाद का वितरण किया जाता है।

4. भादवी छठ / माही सातम

भादवी छठ पर भेरूजी, जबरिया भेरूजी पर चोला चढ़ाया जाता है एवं माही सातम पर माताजी के मंदिरों में पूजा पाठ किया जाता है।

5. डोल ग्यारस

भादो शुक्ल पक्ष एकादशी को जल झूलनी ( डोल ग्यारस ) के रूप में मनाया जाता है। संध्या आरती के पश्चात ठाकुर जी की शोभायात्रा श्री चारभुजा नाथ मंदिर से निकाली जाती है, जिसमें समाज के पुरुषों एवं महिलाओं द्वारा बड़े ही उत्साह एवं उमंग से राजस्थानी वेशभूषा धारण कर प्रभु की मंगलमय शोभायात्रा समाज द्वारा निकाली जाती है। सभी सदस्य उत्साह से शामिल होते हैं। शोभायात्रा में ठाकुर जी का रथ, भजन मंडली, बैंड बाजे, डीजे के साथ हरसिद्धि मंदिर तक जाती है, जहां आरती के बाद पुनः श्री चारभुजा नाथ जी मंदिर पर आती है, वहां पुनः श्रीजी की आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है।

6. नवरात्रि उत्सव

अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकम से दुर्गा नवमी तक नवरात्रि उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें एकम के दिन घट स्थापना होती है। प्रतिदिन रात्रि में 9:00 बजे से रात 11:00 बजे तक भजन कीर्तन होते हैं, तत्पश्चात श्री माताजी की आरती एवं प्रसाद वितरण होता है। अंतिम दिन जागरण के साथ चंद्रभागा नदी के जल में ज्वारे विसर्जित किए जाते हैं। दशमी पर कन्याओं का भोज एवं श्री भोपाजी के लिए प्रसादी वर्ष 1990 के पश्चात से श्री लक्ष्मी नारायण प्रताप जी व्यास खांखला के परिवार द्वारा प्रसादी का आयोजन किया जाता है।

7. कार्तिक मास

कार्तिक कृष्ण पक्ष एकम से शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक दीपदान और दीपमाला का आयोजन किया जाता है जिसमें भजन कीर्तन रात्रि 9:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक होते हैं तत्पश्चात कथा का वाचन पंडित जी द्वारा किया जाता है, आरती पश्चात प्रसाद वितरण होता है |प्रसाद की व्यवस्था प्रतिदिन समाज के विभिन्न सदस्यों द्वारा की जाती है| पूर्णिमा के दिन समाज की प्रबंध कार्यकारिणी एवं अध्यक्ष / उत्सव मंत्री द्वारा समाज की ओर से पंडित एवं पुजारी का सम्मान किया जाता है|

8. अन्नकूट महोत्सव

दीपावली पर्व के पश्चात आने वाले पहले रविवार को अन्नकूट महोत्सव का आयोजन समाज द्वारा किया जाता है। अन्नकूट महोत्सव समिति द्वारा समाज जनों के घर-घर जाकर अन्नकूट प्रसादी के पास वितरित किए जाते हैं और सदस्यों द्वारा प्रभु प्रसादी हेतु स्वेच्छा से सहयोग राशि दी जाती है। इसके अलावा दीपावली के दूसरे दिन यानी पड़वा पर समाज के वरिष्ठ समाजसेवी श्री पुरुषोत्तम गिरधारी लाल जी पुरोहित ( ग्राम - खटामला ) के द्वारा प्रभु प्रसादी का आयोजन किया जाता है, जिसमें समाज के सदस्य और स्नेही जन सम्मिलित होते हैं।

9. महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि फागुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाई जाती है, जिसमें दिन के समय शिवजी का अभिषेक किया जाता है। रात्रि 9:00 से 11:00 बजे तक भजन-कीर्तन, आरती, प्रसाद और भांग-ठंडाई का वितरण किया जाता है।

10. तुलसी विवाह

समाज द्वारा छोटी दीपावली पर तुलसी-शालिग्राम विवाह उत्सव का आयोजन भी हर्ष और उल्लास के साथ किया जाता है। साथ ही यदि समाज का कोई सदस्य इस आयोजन को करना चाहता है तो उसे मुख्य यजमान बनाकर यह उत्सव मनाया जाता है।

11. होली

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर समाज द्वारा बजरंग वाटिका के बाहर होलिका का श्रृंगार कर दहन, मुहूर्त के अनुसार अध्यक्ष महोदय के द्वारा पूजन कर किया जाता है। दूसरे दिन धुलेंडी उत्सव के रूप में समाज में शोकाकुल परिवारों को रंग-गुलाल लगाने हेतु समाज के संचालक मंडल के सदस्यों के साथ-साथ अन्य समाज सदस्यों के द्वारा शोगाला निवारण हेतु शोकाकुल परिवार के घर-घर जाते हैं, उसी दिन सायंकालीन समाज के बच्चों की सामूहिक ढूंढ का आयोजन श्री चारभुजा नाथ के मंदिर में किया जाता है। रंग-गुलाल एवं ढूंढ की आय से ठंडाई एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था भी समाज द्वारा की जाती है।

12. गणगौर

गणगौर उत्सव चैत्र शुक्ल तीज को आता है, जो पूर्ण रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। उसमें प्रतिदिन गणगौर एवं ईसर जी की शोभायात्रा निकाली जाती है तथा समाज के व्यक्तियों के विशेष आमंत्रण प्राप्त होने पर उनके घर ले जाने की व्यवस्था की जाती है। मंदिर से लेकर वापसी तक की व्यवस्था का खर्च आयोजन करने वाले सदस्य द्वारा वहन किया जाता है। यह पर्व एक सप्ताह तक आयोजित होता है, जिसमें अंतिम दिन समाज की उत्सव समिति की ओर से बाना निकाला जाता है और ठंडाई प्रसाद की व्यवस्था की जाती है।

13. करवा चौथ

सामूहिक करवा चौथ का आयोजन समाज द्वारा किया जाता है। समिति द्वारा न्यूनतम राशि ली जाती है। जिसमें विद्वान पंडितों द्वारा जोड़ों से पूजा करवा कर प्रत्येक उद्यापन कर्ता मातृ शक्ति को 50-50 भोजन प्रसादी पास की व्यवस्था की जाती है।

14. हनुमान जन्मोत्सव

श्री पालीवाल बजरंग मंडल द्वारा हनुमान जन्मोत्सव का आयोजन विगत 28 वर्षों से किया जा रहा है। दो दिवसीय इस आयोजन के तहत जन्मोत्सव के एक दिन पूर्व सुंदरकांड का पाठ रामायण मंडल के द्वारा किया जाता है। उत्सव के दूसरे दिन प्रातः काल हनुमंत लाल की कांकड़ आरती, श्री हनुमान मंदिर की सजावट, श्री हनुमान जी के विग्रह का विशेष श्रृंगार, श्री चारभुजा नाथ जी का भव्य श्रृंगार किया जाता है। प्रभु को 56 भोग लगाए जाते हैं और महाप्रसादी का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव में समाज के प्रत्येक रजिस्टर्ड सदस्यों को निमंत्रित किया जाता है। बजरंग मंडल द्वारा प्रति मंगलवार शाम 6:30 बजे भगवान हनुमान जी के समक्ष हनुमान चालीसा पाठ, भजन आरती का आयोजन किया जाता है।

15. एकादशी (ग्यारस)

श्री चारभुजा नाथ जी मंदिर में प्रत्येक एकादशी (ग्यारस) पर भजन मंडली द्वारा प्रभु के सम्मुख भक्ति भाव से रात्रि 9:00 बजे से 11:00 बजे तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम होता है। भजन कीर्तन के पश्चात एकादशी कथा का वाचन पुजारी जी के द्वारा किया जाता है और उसके पश्चात प्रभु की आरती होती है। इसका संचालन समाज के उत्सव मंत्री द्वारा किया जाता है। पालीवाल समाज महिला मंडल द्वारा दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक प्रत्येक एकादशी पर्व पर भजन कीर्तन श्री चारभुजा नाथ जी के समक्ष किया जाता है।

16. अमावस्या

प्रत्येक अमावस्या को श्री चारभुजा नाथ जी भक्त मंडल द्वारा भजन संध्या का कार्यक्रम रात्रि 9:00 बजे से 11:00 बजे तक किया जाता है। इसी दिन श्री चारभुजा नाथ जी पच्चीसी का पाठ होता है।

17. सावन (श्रावण) माह

भगवान भोलेनाथ की आराधना के अत्यंत प्रिय श्रावण माह में श्री संगमेश्वर महादेव और बजरंग वाटिका में विराजित श्री मुक्तेश्वर महादेव का अभिषेक-पूजन पूरे माह आयोजित किया जाता है। विद्वान पंडितों के मार्गदर्शन में समाज के ही महानुभाव सपत्नीक इस अभिषेक-पूजन में शामिल होते हैं। पूर्ण आहुति के पश्चात अभिषेक में शामिल महानुभावों और सदस्यों द्वारा प्रभु प्रसादी का आयोजन भी किया जाता है।

18. लक्ष्मीनारायण मंदिर

श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी की देवपुरी स्थित धर्मशाला पर भगवान लक्ष्मी नारायण जी के मंदिर पर समाज जनों द्वारा ग्यारस, पूर्णिमा और कार्तिक मास में दीपमाला का आयोजन किया जाता है।