श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत लोगोश्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत44 श्रेणी ( रजि. ), इंदौर

समाज का विधान

श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत 44 श्रेणी ( रजि. ), इंदौर

पंजीयन क्रमांक : 03/27/03/08161/31-12-04

पता : 42, जूना तुकोगंज, महाराणा प्रताप मार्ग, इंदौर (म.प्र.)

1. नाम

इस संस्था का नाम श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत 44 श्रेणी, इन्दौर रहेगा, जिसे आगे इसी नियमावली में समाज / संस्था के नाम से संबोधित किया जावेगा ।

2. कार्यालय

समाज का पंजीकृत मुख्य कार्यालय समाज का भवन, श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत 44 श्रेणी, 42, जूना तुकोगंज (महाराणा प्रताप मार्ग), इन्दौर रहेगा।

3. कार्य क्षेत्र

इस संस्था का कार्य क्षेत्र इन्दौर जिला नगर क्षेत्र रहेगा।

4. उद्देश्य

(अ) श्री चारभुजानाथ परिसर, समाज की चल-अचल संपत्ति को सुरक्षित और सुव्यवस्थित रखना, समाज के स्वामित्व के संस्थान का सुचारू प्रबंध करना ताकि उसका उपयोग समाज के प्रत्येक सदस्य के परिवार के लिए सामाजिक एवं धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यों हेतु हो सके (ब) समाज में एकता, भातृभाव, शिक्षा का प्रचार करना, योजना बनाना और उसे क्रियान्वित करना (स) समाज में प्रचलित कुप्रथाओं, अनुचित बंधनों पर नियंत्रण करना। (द) सदस्यों के धार्मिक, शैक्षणिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक उन्नति हेतु प्रयत्न करना, तत्संबंधी आयोजन करना एवं उन्हें गति देना। (क) सदस्यों में प्रेम, सद्भावना को दृढ़ करना और समाज को शांतिमय और वैध उपायो से संगठित करना (ख) गौ-शाला, स्कूल व अस्पताल निर्माण कराना व संचालन करना।

5. सदस्यता

समाज के निम्नलिखित व्यक्ति सदस्य होंगे: (अ) ऐसे व्यक्ति स्त्री / पुरुष जो श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज 44 श्रेणी के हों। (ब) जो इन्दौर जिला क्षेत्र में निवास करते हों। (स) संयुक्त परिवार का मुखिया हो। (द) जिसकी आयु 18 वर्ष से कम न हो। सदस्यता हेतु निर्धारित आवेदन-पत्र के साथ निम्न शुल्क जमा कराना होगा: 1) आजीवन सदस्यता शुल्क 1501/- एकमुश्त जमा करवाने पर। 2) वार्षिक सदस्यता शुल्क 24/- प्रति वर्ष अथवा 2/- प्रतिमाह देय होंगे। उपरोक्त 1 व 2 के अतिरिक्त निम्न शुल्क भी जमा कराना होगा: (अ) प्रवेश शुल्क : रुपये 11/- (ब) भवन शुल्क समय-समय पर निर्धारित (स) अन्य शुल्क जो निर्धारित किया जावे। एक ही परिवार के सदस्य यदि पृथक-पृथक रहते हैं, तो वे पृथक-पृथक शुल्क जमा करने पर ही सदस्य माने जावेंगे।

6. सदस्यता की मान्यता

सदस्यता के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन मय प्रवेश शुल्क, सदस्यता शुल्क तथा साधारण सभा द्वारा निर्धारित अन्य शुल्क प्राप्त होने पर कार्यकारिणी समिति को उसके स्वीकृत / अस्वीकृत करने का अधिकार होगा।

7. सदस्यता हेतु योग्यता

1. आवेदक की आयु 18 वर्ष से कम नहीं हो। 2. भारत का नागरिक एवं समाज का व्यक्ति हो। 3. समाज के नियमों का पालन करने की प्रतिज्ञा ली हो। 4. सद्चरित्र हो। 5. मद्यपान न करता हो।

8. सदस्यता समाप्ति

1. मृत्यु हो जाने पर। 2. पागल हो जाने पर। 3. नियम में वर्णित सदस्यता शुल्क और समाज की देय राशि जमा न करने पर व सूचना देने के उपरांत भी जमा न करने पर सदस्यता स्वतः समाप्त हो जावेगी। ऐसे सदस्य द्वारा पुनः सदस्यता हेतु आवेदन किया जा सकेगा। 4. त्याग पत्र देने एवं विधिवत स्वीकृत होने पर। 5. समाज के उद्देश्यों के विपरीत आचरण करने या चारित्रिक दोष होने पर कार्यकारिणी समिति को शिकायत प्राप्त होने पर सदस्यता से पृथक किया जा सकेगा। 6. कार्यकारिणी समिति के किसी भी सदस्य के साथ अभद्रता की शिकायत प्राप्त होने पर कार्यकारिणी समिति उस सदस्य को पृथक करने का निर्णय ले सकती है। 7. संस्था के नियमों के उल्लंघन, समाज संबंधी भ्रामक प्रचार, मर्यादा तथा अनुशासन भंग की शिकायत प्रमाणित होने पर सदस्यता से पृथक किया जा सकता है, जिसका कार्यकारिणी को अधिकार होगा।

9. सदस्य पंजी

संस्था कार्यालय में सदस्यों की पंजी रखी जावेगी, जिसमें निम्न ब्यौरे दर्ज किये जावेंगे : 1. प्रत्येक सदस्य का नाम, पता, व्यवसाय एवं तिथि सहित हस्ताक्षर। 2. वह तारीख जिसको सदस्यों को प्रवेश दिया गया हो व रसीद नं। 3. वह तारीख जिसमें सदस्यता समाप्त हुई हो। 4. मूल निवासी (गांव)।

10. साधारण सभा

साधारण सभा में नियम 5 में दर्शाये श्रेणी के सदस्य समावेशित होंगे साधारण सभा की बैठक आवश्यकतानुसार हुआ करेगी, परन्तु वर्ष में एक बार बैठक अनिवार्य होगी। बैठक का माह तथा बैठक का स्थान व समय कार्यकारिणी समिति निश्चित कर 15 दिवस पूर्व प्रत्येक सदस्य को सूचना दी जावेगी, बैठक का कोरम 3/5 सदस्यों का होगा। संस्था की प्रथम आम सभा पंजीयन दिनांक से 3 माह के भीतर बुलाई जावेगी, उसमें संस्था के पदाधिकारियों का विधिवत निर्वाचन किया जावेगा, यदि संबंधी आम सभा का आयोजन किसी समय नहीं किया जाता, तो पंजीयक को अधिकार होगा कि वह संस्था की आम सभा का आयोजन किसी जिम्मेदार कर्मचारी के मार्गदर्शन में पदाधिकारियों का विधिवत चुनाव कराया जावेगा।

11. विशेष साधारण सभा

संस्था के 2/3 सदस्यों के लिखित आवेदन पर या कार्यकारिणी समिति द्वारा विशेष साधारण सभा बुलाई जा सकती हैं। उस सभा में निम्न कार्यवाही की जा सकेगी: 1. जिस विशेष कारण के लिए सभा बुलाई गई, उसी पर चर्चा होगी। वह भी इस विधान के दायरे में होगी। 2. यदि वार्षिक साधारण सभा की अवधि बकाया है, तो सभी विषयों पर चर्चा हो सकेगी 3. विशेष साधारण सभा की सूचना नियम 10 के अनुसार दी जावेगी। साधारण सभा की सूचना किसी भी स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित की जावेगी। समाज के भवन भैरुजी के ओटले पर सूचना लगाना व लिखित सूचना प्रत्येक सदस्य को भेजी जावेगी।

12. साधारण सभा के अधिकार

1. संस्था का गत वर्ष का आय - व्यय एवं वार्षिक विवरण स्वीकृत करना। 2. चार्टर्ड एकाउंटेंट से लेखा परीक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत करना। 3. संस्था द्वारा संचालित संस्थानों के आय - व्यय पत्रकों को स्वीकृत करना। 4. बजट का अनुमोदन करना। 5. अन्य विषयों पर विचार जो कार्यकारिणी समिति द्वारा प्रस्तुत हो।

13. कार्यकारिणी का गठन

नियम 5 में दर्शाये गये सदस्यों, जिनके नाम पंजीयन पंजी में दर्ज हों, बैठक में बहुमत के आधार पर निम्नांकित पदाधिकारियों तथा प्रबंधकार्यकारिणी समिति के सदस्यों का निर्वाचन होगा। 1. अध्यक्ष 2. उपाध्यक्ष 3. मंत्री 4. सह - मंत्री 5. कोष मंत्री 6. भवन मंत्री 7. शिक्षा मंत्री 8. भंडार मंत्री 9. उत्सव मंत्री एवं 12 कार्यकारिणी सदस्यों का निर्वाचन किया जावेगा। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं मंत्री पद के उम्मीदवार की आयु 45 वर्ष पूर्ण अथवा 45 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

14. कार्यकारिणी समिति के अधिकार व कर्तव्य

(अ) नियमावली में वर्णित उद्देश्यों को कार्यान्वित करना, पूर्ति हेतु उचित व्यवस्था करना। (ब) पिछले वर्ष का आय - व्यय का लेखा पूर्णतः परीक्षित किया हुआ प्रगति प्रतिवेदन के साथ साधारण सभा में प्रस्तुत करना तथा चार्टर्ड अकाउंटेट नियुक्त करना। (स) समिति एवं उसके अधीन संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन आदि का निर्धारण करना, अध्यक्ष की अनुमति से भुगतान करना, नियुक्ति एवं सेवा शर्तों का निर्धारण करना तथा संस्था की चल - अचल संपत्ति पर लगने वाले करों का भुगतान करना। (द) संस्था की समस्त चल - अचल संपत्ति कार्यकारिणी समिति के अधीन रहेगी। (क) अन्य आवश्यक कार्य करना, जो साधारण सभा द्वारा पारित हो। (ख) संस्था द्वारा कोई भी स्थावर संपत्ति साधारण सभा की स्वीकृति की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय द्वारा या अन्यथा अर्जित या अंतरित नहीं की जायेगी (ग) विधान में संशोधन हेतु प्रबंधकारिणी समिति द्वारा प्रारूप तैयार कर साधारण सभा की स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करना एवं साधारण सभा में उपस्थित सदस्यों के 2 / 3 मत से पारित होने पर प्रस्ताव अनुमोदन हेतु पंजीयक को भेजना। (घ) प्रबंधकारिणी की बैठक प्रति 3 माह में रखना आवश्यक है। लगातार 3 बैठकों में अनुपस्थित रहने पर ऐसे सदस्य को पृथक किया जा सकता है। कार्यकारिणी की बैठक का कोरम कुल सदस्यों के आधे से अधिक रहेगा। (च) कार्यकारिणी समिति में किसी कारण से रिक्त हुए पद का सहयोजन कार्यकारिणी समिति कर सकती है। (छ) कार्यकारिणी समिति के गठन के पश्चात 5 सदस्यों की निरीक्षण समिति का गठन किया जावेगा। आवश्यकतानुसार समिति के सदस्यों को बैठक में आमंत्रित किया जा सकेगा। (ज) धर्मशाला, बर्तन आदि के किराये एवं व्यवस्था हेतु उपनियम बनाना और उसके अनुसार व्यवस्था करना। (झ) अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यकतानुसार उपसमितियाँ गठित करना एवं उनके नियम बनाना।

15. कार्यकारिणी समिति की अवधि

कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल 3 वर्ष का रहेगा।

16. अध्यक्ष के अधिकार

साधारण सभा / कार्यकारिणी समिति के बैठकों की अध्यक्षता करना। मंत्री द्वारा साधारण सभा / कार्यकारिणी समिति की बैठक का आयोजन करवाना। विवाद की स्थिति में समान मत होने पर अध्यक्ष का मत निर्णायक होगा। अध्यक्ष संस्था के लेखा - जोखा एवं कार्यकलाप पर नियंत्रण रखेगा। पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश देगा। स्वीकृत बजट के अनुसार व्यय को स्वीकृति देना।

17. उपाध्यक्ष के अधिकार

अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष, अध्यक्ष के अधिकारों का उपयोग करेगा।

18. मंत्री के अधिकार

(अ) साधारण सभा / कार्यकारिणी समिति की बैठक बुलाना और स्वीकृत प्रस्तावों को क्रियान्वित करवाना। आवेदन पत्र और सुझाव जो प्राप्त हों, निराकरण हेतु प्रस्तुत करना। (ब) संस्था का आय - व्यय का लेखा परीक्षण और संस्था का प्रतिवेदन तैयार कर प्रस्तुत करना। (स) संस्था के सारे कागजात तैयार करना / करवाना / उनका निरीक्षण करना। अनियमितता पायी जाने पर कार्यकारिणी को सूचित करना। (द) संस्था का पत्र व्यवहार करना। (क) किसी विशेष कार्य के लिये अध्यक्ष द्वारा लिखित में अनुमति देने पर एक समय में पाँच हजार रुपये तक व्यय करने का अधिकार होगा।

19. सह मंत्री के अधिकार

(अ) मंत्री की अनुपस्थिति में मंत्री के संपूर्ण अधिकार सहमंत्री को रहेंगें। (ब) मंत्री के निर्देश पर मंत्री को पूर्ण सहयोग करेंगे।

20. कोषाध्यक्ष के अधिकार

(अ) संस्था की धनराशि का पूर्ण हिसाब रखना। आय - व्यय प्रपत्र तैयार करना। हिसाब का अंकेक्षण कराना। (ब) कार्यकारिणी समिति, अध्यक्ष एवं मंत्री द्वारा स्वीकृत होने पर व्यय करना। (स) संस्था का आर्थिक वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च रहेगा।

21. बैंक खाते का संचालन

संस्था की समस्त निधि किसी अधिकृत बैंक में रहेगी। धन का आहरण अध्यक्ष, मंत्री और कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।

22. भवन मंत्री के अधिकार

(अ) समाज की समस्त भूमि / अचल संपत्ति के दस्तावेज रजिस्टर में दर्ज करना एवं उनकी सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था करना। (ब) नवीन भवन निर्माण / वर्तमान भवन के रखरखाव की विधिवत व्यवस्था करना एवं समाज का भवन समाज के सदस्यों को तथा अन्य सदस्यों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना।

23. भंडार मंत्री के अधिकार

संस्था की समस्त चल संपत्ति तथा धर्मशाला के बर्तनों का रिकॉर्ड रखना तथा नियमानुसार उनके उपयोग के लिये व्यवस्था करना।

24. शिक्षा मंत्री के अधिकार

संस्था द्वारा स्वीकृत योजना के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में योजना तैयार करना और उसे स्वीकृति के पश्चात क्रियान्वित करने की व्यवस्था करना।

25. उत्सव मंत्री के अधिकार

समाज द्वारा स्वीकृत उत्सवों एवं धार्मिक तथा सामाजिक कार्यक्रमों को स्वीकृत बजट के अनुसार आयोजन करना।

26. पंजीयक को जानकारी भेजना

अधिनियम की धारा 27 के अन्तर्गत संस्था की वार्षिक आम सभा होने से 15 दिन के अन्दर निर्धारित प्रारूप में कार्यकारिणी समिति की सूची तथा संस्था लेखा परीक्षित कर धारा 28 के अंतर्गत संस्था की परीक्षित लेखा भेजा जावेगा।

27. विवाद संबंधी बैठक

संस्था में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न होने पर अध्यक्ष को साधारण सभा की अनुमति से उसे सुलझाने का अधिकार होगा। यदि कोई निर्णय से संतुष्ट न हो तो वह रजिस्ट्रार के समक्ष विवाद प्रस्तुत कर सकता है। रजिस्ट्रार का निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होगा। संचालित सभाओं के विवाद अथवा प्रबंध समिति के विवाद उत्पन्न होने पर अंतिम निर्णय देने का अधिकार रजिस्ट्रार को होगा।

28. विशेष संशोधन

संविधान में संशोधन के विषय में यह स्पष्ट है कि ऐसा संशोधन जो समाज / संस्था के हित में आवश्यक है एवं साधारण सभा में बहुमत से पारित नहीं है किंतु पंजीयक एवं प्रबंधकारिणी का मत स्वीकृति के पक्ष में है, ऐसी स्थिति में पंजीयक द्वारा पारित किया जा सकता है।

29. विघटन

विघटन हेतु बुलाई गई साधारण सभा में कुल उपस्थित सदस्यों के 3 / 5 बहुमत से प्रस्ताव पारित किया जायेगा। विघटन के पश्चात संस्था की चल - अचल संपत्ति श्री पालीवाल ब्राह्मण समाज पंचायत 44 श्रेणी, इन्दौर के अधिकार में रहेगी। जिसका निर्णय इसी साधारण सभा में बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जावेगा। सम्पत्ति समान उद्देश्य वाली संस्था को सौंप दी जायेगी।

30. संपत्ति

संस्था की समस्त चल - अचल संपत्ति संस्था के नाम से रहेगी। संस्था की अचल संपत्ति(स्थावर) रजिस्ट्रार, फर्म्स, संस्थाओं की लिखित अनुज्ञा के बिना विक्रय द्वारा, दान द्वारा, क्रय अथवा अन्य प्रकार से अर्जित या अंतरित नहीं की जा सकेगी। आवेदन निर्धारित शुल्क के साथ किया जायेगा।